जनेउवैअकें में प्रतिभासंपन्न एवं विविधता से युक्त छात्र-निकाय स्थित है । सद्यतः, केन्द्र के विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रमों में पंजीकृत 220 अधिक छात्र हैं । जहाँ इनमें से अधिकांश छात्र अपने Ph.D उपाघि का अनुसरण कर रहे हैं । हमारे पास समेकित Ph.D, M.S / M.S (अभि.) कार्यक्रमों में नामांकित / प्रवेश पात्र छात्र भी हैं । जनेउवैअकें पर छात्रों की जनसंख्या को देश भर से लिया गया है । इसके अतिरिक्त, विभिन्न (विनिमय) आदान-प्रदान कार्यक्रमों के अधीन केन्द्र पर अक्सर विदेशी छात्रों का आगमन भी होता है ।

प्रत्येक वर्ष के अगस्त सत्र के दौरान केन्द्र पर कार्यग्रहण करनेवाले अधिकांश नये छात्रों को ग्रीष्म के प्रारंभ में आयोजित साक्षात्कारों में उनके निष्पादन के आधार पर प्रवेश दिया जाता है । कुछ कार्यक्रमों के शैक्षिक वर्ष (अर्थात जनवरी सत्र के प्ररंभ में ही) द्वारा मध्य में ही छात्रों को प्रवेश देने के बारे में विचार किया जाता है । इन साक्षात्कारों के लिये विचार करने हेतु अर्ह होने के लिये छात्रों को विविध मानदंडों को पूरा करना होता है जैसे नीचे उल्लेख किया गया है । इन कार्यक्रमों में प्रवेश अत्यंत प्रतियोगात्मक होता है ।

केन्द्र के कार्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त सभी छात्र इतनी छात्र वृत्ति राशि प्राप्त करते हैं जो उनके शिक्षण शुल्क तथा जीवन व्यय - साथ ही छात्रावास शुल्क आदि के लिये पर्याप्त होती है । हम सामान्यतः यह अपेक्षा रखते हैं कि एक नियमित Ph.D कार्यक्रम पूरा करने के लिये छात्र 5 वर्षों से अधिक अवधि न लें । समेकित Ph.D कार्यक्रम में साथ ही M.S उपाधि में भी विशिष्ट रूप से अपने अध्ययन में से 3 वर्षों में पूरा कर सकते हैं ।

अपने णनुसंधान के अतिरिक्त, छात्र, अपने लिये अपेक्षित तथा चयनित पाठ्यक्रम के संयोजन को ले सकते हैं। पाठ्यक्रम के अधिकांश तो परिसर में ही होते हैं तथा केन्द्र के संकाय द्वारा ही सिखाये जाते हैं। परंतु छात्र बेंगलूर क्षेत्र के अन्य वैज्ञानिक संस्थाओं में भी कुछ पाठ्यक्रम में उपस्थित होने के बारे में चयन कर सकते हैं । नियमित शैक्षिक पाठ्यक्रमों के दो वर्ष पूरा कर लेने के बाद, छात्रों को एक व्यापक मौखिक परीक्षा में उत्तीर्ण होना होता है जहाँ उन्हें अपने अनुसंधान तथा अपने पाठ्यक्रम के कार्यों में व्याप्त विषयों के बारे में लेख प्रस्तुत करने हैं तथा उनसे उनके बारे में प्रश्नावली दी जाती है।

वर्ष 2002 से केन्द्र को एक ' मान्यता प्राप्तेय विश्वविद्यालय ' के रूप में विश्वविद्यालय अ आ द्वारा मान्यता प्राप्त है तथा छात्रों को उपाधियाँ जनेउवैअकें द्वारा सीधे ही प्रदान की जाती हैं । केन्द्र की स्थापना से लेकर अब तक 114 उपाधियाँ प्रदान की गई हैं, इनमें सम्मिलित हैं - 74 Ph.D, 19 M.S उपाधियाँ (समेकित Ph.D), 20 M.S (अभि.) तथा 1 M.Sc. (अनुसंधान जैविकीय विज्ञान द्वारा)। केन्द्र के पूर्व सफल शैक्षिक व्यावसायिक जीवन का आनंद ले रहे हैं तथा संसार भर में व्याप्त हो चुके हैं ।

अनुसंधान कार्यक्रम

अंतर्शाखाओं में भी अनुसंधान अभिरुचियों को भी प्रोत्साहित किया जाता है

रासायनिकी एवं पदार्थ भौतिकी एकक

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अनुसंधान का केन्द्र बिंदु (कोड़) सिद्धांत है - नवल तथा कार्यात्मक पदार्थों का अध्ययन । परमाणुवीय तथा अणुवीय स्तर पर भौतिक तथा रासायनिक परिघटनाओं को समझ लेने के लिये प्रयोगात्मक एवं संगणनात्मक अभिगमों का उपयोग किया जा रहा है ।

अनुसंधान क्षेत्र :

अनुसंधान क्षेत्र - नानो पदार्थों के संश्लेषण, संरचनात्मक विद्युतीय तथा चुंबकीय गुणधर्म, गुच्छ किरणें, अंतरापृष्ठ, विशाल चुंबक अवरोध ऑक्सोइड (जंग), पतली फ़िल्में, अनिल संवेदक तथा नवल मध्य रंध्र पदार्थ । चालक बहुलकों के उपयोग द्वारा आण्विक विद्युन्मानिकी, जैविक विद्युन्मानिक साधन, जैव प्रकाश मात्रिकी, प्रकाशीय वर्णक्रमदर्शी, उच्च दाब के अधीन पदार्थ । हरित विलायकों के आण्विक अनुरूपण पदार्थ एवं प्रोटीन विलायक । प्रयोगात्मक तथा संगणनात्मक अनुसंधानों के संचालन हेतु सन्नद्ध सुविधाएँ उपलब्ध है । इनमें सम्मिलित हैं - चलायमान अंचल भट्टी (फ़्लोटिंग ज़ोन फ़र्नेस) परमाCgणु बल संवीक्षण सुरंगन सूक्ष्मदर्शक, प्रेषित तथा संवीक्षक विद्युदणु सूक्ष्मदर्शक, उच्च गति प्रकाश विद्युन्मानिकी प्रयोगालय, 30 GPa तक दाब प्राप्त करने हेतु वज्र संदान कक्ष, 15 टेल्सा उच्च चालक चुंबक एकल स्फटिक एवं चूर्ण क्ष-किरण विवर्तनमापी, अवरक्त, दृश्यमान रामन तथा ब्रिलोइन वर्णक्रम मापी तथा संगणनात्मक अनुसंधान के लिये बीओल्फ़ समानांतर संगणक ।

अभियांत्रिकी यांत्रिकी एकक

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अभियांत्रिकी यांत्रिकी एकक में अनुसंधान में निम्न में से एक या एक से अधिक कार्यकलापों से युक्त हैं :- यह वीक्षण करना कि हमारे पवन सुरंग में कोई कीट कैसे उड़ता है तथा वह हमारे वायुयान की उड़ान से किस प्रकार से भिन्न होता है; यह विश्लेषण करना कि किस प्रकार विविध बहाव स्तरीय से विक्षोभीय पारगमन में कार्य करते हैं, तथा क्यों कुछ अल्प मात्राओं में अल्प परिवर्तन उत्तरों पर किस प्रकार भारी प्रभाव डालते हैं । हम इन प्रश्नों का समाधान - अंतरिक्ष, रासायनिक (अ-न्यूटनीय, बहु प्रावस्था) तथा जैविकीय (अर्थात रक्त) बहाव, यह पूछना कि कुछ प्रकार की चट्टाने (शिलाखंड) की विशिष्ट प्रकार के रूप पद्धतियाँ होती हैं, सूक्ष्म तथा नानो-मान बहावों की संगणना करना यह देखना कि ये बहाव, उन बहावों से भिन्न क्यों होते हैं जिसे हम रोज़ देखते हैं, भूमिल गतिकी के बारे में समझ लेना, अरेखीय गतिकी तथा अव्यवस्था, भूमि के निकट की पृथ्वी के वातावरण में वायु-बहाव तथा तापमान प्रतिरूपों को समझना तथा मौसम पर उनका प्रभाव भारतीय मानसून की वर्षापात में या अन्य वातावरणीय परिवर्तनों में उपस्थित प्रतिरूपों या अनुक्रम को प्राप्त करना, यह पता लगाना कि क्षोभकारी अपरूपण बहावों का विकास का नियंत्रण स्थिरता विचारों से तो नहीं किया जाता, रात्रि की वातावरणीय निम्नतम परतों में किस प्रकार विकिरण तथा विक्षोभ एक दूसरे के साथ अंतर्क्रिया करते हैं - इसकी संगणना करना ।

पूर्वापेक्षी (भविष्य) के छात्र के लिये निम्न क्षेत्रों में से किसी का भी भविष्य के अनुसंधान के विषय के रूप में चयन उपलब्ध या वह अपना चयन/अपनी पसंद, अगर संभव हो तो बता भी सकता/ती है।

विकासवादी एवं जैविकीय जैविकी एकक

अधिक जानकारी के लिये संयोजन EOBU से संपर्क करें -

1. पशु / प्राणी यह कैसे जानते है कि अब दिन का समय क्या है ?
2. मस्तिष्क में स्थित तंत्रिका कोशिका अंतर संयोजकता, किस प्रकार पशुओं के दैनिक - लय पर प्रभाव डालती है ।
3. कुछ जनसंख्याओं में विशिष्ट रूप से मृत्यु दर स्थिर हो जाती है ?
4. संसाधन की उपवब्धता का प्रतिरूप तथा आनुवंशिक संबद्धता किस प्रकार पशु सामाजिक समूह की प्रकृति (के स्वभाव) पर प्रभाव डालती हैं ।
5. विकासवादी परिवर्तन के मार्ग पर किस प्रकार आनुवंशिक तथा पारिस्थितिकी प्रभाव डालती हैं ?

इन्हीं कुछ प्रश्नों का समाधान हम ढूँढ़ रहे हैं- इसके लिये हम कुछ अभिगमों का संयोजनों का उपयोग कर रहे हैं (जैसे प्रयोगालयी प्रयोग, संगणना अनुरूपण, क्षेत्र अध्ययन) तथा ऐसी अनेक श्रेणियों के तकनीकों का उपयोग भी कर रहे हैं जैसे- मात्रात्मक आनुवंशिकी, प्रतिलोम जेनोमिक्स, फेनोमिक्स, व्यवहार अध्ययन। मनोविज्ञान, आण्विक जैविकी, पारिस्थितिकी, गणितिकी तथा सांख्यिकी। हमारे प्रयोगात्मक कार्यों में सम्मिलित हैं- दोनों कीट (फलमक्खियाँ तथा चींटियाँ) तथा स्तनी (मूषिक) प्रतिरूप प्रणालियाँ तथा प्रयोगालय की सुविधाओं में सम्मिलीत हैं- संसार का सबसे भारी लोकोमोटर क्रियाकलाप अनुश्रवण साधन। क्षेत्र अध्ययन बेंगलूर में फलमक्खियों पर किया गया है तथा हाथियों पर अध्ययन पश्चिमी घाट में। हमसे किया गया अधिकतर कार्य भारत में अन्यत्र कहीं भी नहीं किया गया है। पूर्वापेक्षी छात्र डाक्टरोत्तर छात्र जो जिस अत्युत्तम अनुसंधान में सम्मिलित होना चाहते हैं, वे हैं - कालक्रमिक जैविकी, विकासवादी आनुवंशिकी, जनसंख्या पारिस्थितिकी, वन्यजीव जैविकी, पशु-व्यवहार तथा तंत्रिका कोशिका आनुवंशिकी उन्हें हम स्वागत करते हैं ताकि वे हमसे संपर्क कर लें ।

अंतर्राष्ट्रीय पदार्थ विज्ञान केन्द्र

अधिक जानकारी हेतु संयोजन ICMS से संपर्क करें

 

आण्विक जैविकी एवं आनुवंशिकी एकक

अधिक जानकारी हेतु संयोजन MBGU से संपर्क करें

आण्विक जैविकी एवं आनुवंशिकी एकक में जो अनुसंधान हो रहा है - वह जैवऔषधीय अनुप्रयोगों के सामना सूत्र से अबद्ध जैविकी के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित है । वर्तमान अनुसंधान क्षेत्र हैं - सांसर्गिक रोग, कोशिका चक्र, वर्णक संगठन तथा अनुलेखन नियंत्रण, विकासात्मक जैविकी एवं आनुवंशिकी ।

छात्रों को निम्न के प्रति अभिगम्यों का उपयोग करने का अवसर प्राप्त हैं - आण्विक जैविकी तथा जैवरासायनिकी, आधुनिक कोशिका तथा विकासात्मक जैविकी तथा अत्याधुनिक जैनोमिक्स अभिगम।

नया रासायनिक एकक

अधिक जानकारी हेतु संयोजन NCU से संपर्क करें

यह एकक रासायनिक विज्ञान की अंतर्शाखाओं के पहलुओं पर कार्य करता है । इसके महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं - जिन पर एकक अपना ध्यान केंद्रीकृत करता है - वे हैं - रासायनिक जैविकी तथा पदार्थों के साथ रकसायनिक विज्ञान के अंतरापृष्ठ । इस एकक में प्रयोगात्मक कार्य साथ में संगणनात्मक एवं सैद्धांतिक अध्ययनों के लिये उत्कृष्ट सुविधाएँ उपलब्ध हैं ।

 यह एकक Ph.D उपाधि के लिये अनुसंधान का अनुसरण के इच्छुक छात्रों को प्रवेश देता है ।

सैद्धांतिक विज्ञान एकक

अधिक जानकारी हेतु संयोजन TSU से संपर्क करें

सांख्यिकीय यांत्रिकी, संघनित पदार्थ भौतिकी तथा पदार्थ विज्ञान ।

संघनित पदार्थ प्रणालियाँ मूलभूत तथा तकनीकीय अभिरुचियों के अनेकों चुनौती भरी समस्याओं का समाधान करता है। इस सैद्धांतिक विज्ञान एकक में अनुसंधान, इन समस्याओं के समाधान हेतु अनेक अभिगम्यों का उपयोग करता है जिसमें सम्मिलित हैं - प्रमात्रा बहु काय सिद्धांत, विद्युन्मानीय संरचना परिकलना तथा सांख्यिकीय यांत्रिकी । हम विश्लेषणात्मक परिकलनाओं का संयोजन विस्तृत सन्नद्ध संगणना के साथ करते हैं जिसके लिये आरंभिक तथा प्रयोगाश्रित प्रतिरूपों का उपयोग करते हैं ।

हमारे वर्तमान अध्ययनों में सम्मिलित हैं - सतह भौतिकी, लौहविद्युतिकी तथा बहु लौहिकी, संरचनात्मक प्रावस्था पारगमन, तनुकृत चुंबकीय अर्ध-चालक, स्थिरता परमाणुवीय तथा विद्युन्मानीय, नानो-गुच्छों एवं नानों तारों की संरचनाएँ, अतिशीतलित द्रवों में मंद गतिकी, काँच पारगमन, काँच पारगमन, द्रव-द्रव पारगमन, प्रावस्था रूपांतरण बलगतिकी, जैव आण्विक प्रणालियों की बलगतिकी एवं ऊष्मागतिकी, अरेखीय प्रकाशिकी, निम्न आयामों में प्रमात्रा चुंबकत्व, नानो-संरचनाओं में विद्युतीय परिवहन तथा जैविकीय प्रणालियों में इलेक्ट्रॉन तथा प्रोटॉन स्थानांतरण ।