जवाहरलाल नेहरु उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केन्द्र
 
 

 
   
रासायनिकी में उत्कृष्टता के
CSIR केन्द्र

गृह CSIR आंतरिक
रासायनिकी में उत्कृष्टता के CSIR केन्द्र
 

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के पास ऐसा कार्यक्रम है जो अग्रपंक्ति के तथा अनुसंधान के विभिन्न अंतर्शाखाओं में, उत्कृष्ट व्यक्तियों या समूहों को पहचानने, उन्नयन करने तथा आर्थिक सहायता देने के लिये तथा अभिरुचि के क्षेत्रों में प्रशिक्षित अनु. एवं विकास कार्मिकों को तैयार करने के उद्देश्य से उत्कृष्टता केन्द्रों की स्थापना करना । जनवरी 1991 में CSIR ने इस व्यक्ति आधारित रासायनिकी में उत्कृष्टता केन्द्र की स्थापना की है ।

यह केन्द्र घन-अवस्था तथा पदार्थ रासायनिकी के विभिन्न पहलुओं पर कार्य करता है । इस CSIR केन्द्र निम्नलिखित पहलुओं के मुख्य कार्यकलापों का संचालन करता है ।

• नवल संरचनाओं तथा गुणधर्मों के साथ अभिकल्पक घन पदार्थ अधि-आण्विक रासायनिकी, ढाँचा संरचनाओं वाले सरंध्र घन, स्फटिक वर्धन एवं रामन तथा ब्रिलोइन छितराव ।

• नानो नलिकाओं (बहु भित्तीय तथा एकल भित्तीय कार्बन नानो नलिकाओं संधि नानो नलिका, कोर सेल नाना संरचनाएँ परिवर्तन नानो नलिकाएँ जैसे (" hfhhपिपॉड ", C60@SWNTs) के संश्लेषण, शुद्धिकरण, कार्यात्मकता तथा विलयकता के लिये नयी कुशलताओं का विकास करने हेतु विद्युतीय परिवहन प्रकाशीय तथा अन्य कार्यात्मक गुणधर्मों के अध्ययन करने के लिये ।

• नई संश्लेषित (कुशलता) तंत्रात्मकता के उपयोग द्वारा मूलतत्वों, धातु आक्सोइडों, नाइट्राइडों तथा चाल्कोजेनाइडों सहित विभिन्न प्रकार के अजैविक पदार्थों की नानो-नलिकाओं तथा नानो-तारों के संश्लेषण, संलक्षण वर्णन तथा गुणधर्म वर्णन ।

• यांत्रिकीय विद्युन्मानीय, संवेदक तथा अन्य साधनों में संभाव्य अन्वयन हेतु उनके गुणधर्मों में वर्धन के लिये विभिन्न पहलुओं के साथ नानो-नलिकाओं तथा तारों के संयुक्तों का संश्लेषण ।

• उच्च तापमान, उच्च चालकता, विशालकाय चुंबक आवरोधकता, धातु संवेष्ठन पारगमन तथा बहु कार्यात्मकता सहित पारगमन धातु आक्साइड़ प्रणालियों द्वारा प्रदर्शित परिघटनाओं तथा गुणधर्मों का प्रमुख अध्ययन ।

• द्रव - द्रव अंतरापृष्ठ पर, लिगांड सेल रूपांतरण कोर सेल नानो स्फटिकों चमत्कारी अनुनाभिक नानो स्फटिकों, मध्य अदिश संयोजनों के साथ - साथ कलिलीय सेल में धातु एवं अर्ध चालक नानो स्फटिकों / नानो-कणों का संश्लेषण ।

 



 
2012, जवाहरलाल नेहरु उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केन्द्र. Supported by W4RI