जवाहरलाल नेहरु उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केन्द्र
 
 

 
   
अभियोंत्रिकी याँत्रिकी एकक

गृह EMU आंतरिक
अभियोंत्रिकी याँत्रिकी एकक
 

यह एकक निम्न विभिन्न प्रकार के मूलभूत तथा अनुप्रयुक्त अपेक्षा की विभिन्न प्रकार की समस्याओं पर अनुसंधान का अनुसरण करता है - द्रव यांत्रिकी, अरेखीय द्रविकी, उष्ण स्थानांतरण तथा घन यांत्रिकी जिसके लिये अनेक प्रकार के विश्लेषणात्मक अंकात्मक एवं प्रयोगात्मक तकनीकों का उपयोग किया गयो है । इस एकक में संचालित द्रव यांत्रिकी अनुसंधान विस्तृत श्रेणी के विषय व्याप्त हैं - जैसे नानो-मानों पर भू तथा तारा भौतिकीय मानों पर बहावों को समझना । अरेखीय गतिकी के अनुसंधान में व्याप्त हें - सौर मंडल गतिकी, चक्रवात गतिकी तथा आदर्श द्रव समीकरण के भून्तीय निर्वचन । विकिरणीय तथा संवनीय उष्ण स्थानांतरण जो विशेषकर वातावरण में यह एक और सक्रिय अनुसंधान का क्षेत्र रहा है ।
हम यांत्रिकीय, तथा वास्तव में तैराकों तथा उड़ाकों के साथ में जीवाणुवों, कीटों, वायुयानों तथा पनडुब्बियों पर कार्य करते हैं । हम सूक्ष्म संरचित संकीर्ण द्रवों तथा स्तरीकृत द्रवों के बहावों की परीक्षा करते हैं। पहलेवाले के उदा. में सम्मिलित होते हैं - मृत्तिका निलंबन, वातकण (एरोसोल), एमलसन (पायस) कणकीय माध्यम तथा बहुलक विलायक, जहाँ / जब वातावरण सागर तथा ज्वालामुखी - बहाव - तो प्रकृति में होनेवाली स्तरीकृत प्रणालियों के उत्कृष्ट उदा. हैं ।

भारी एवं लघु दोनों मानों पर प्रचलनशील भौतिकीय यांत्रिकता का मूलभूत ज्ञान प्राप्त करना ही सभी मामलों का महत्वपूर्ण अंश रहा है । हम ऐसे संकीर्ण / जटिल बहावों के सरल द्रवों पर भी कार्य करते हैं - जैसे अस्थिरता के परिणामस्वरूप, उभरनेवाला जल/इसके पीछे का विचार है - यह समझ लेने का है कि किस प्रकार कोई भी बहाव या प्रणाली अस्थिर हो जाता/ती है तथा नयी संभवतः अव्यवस्थापूर्ण या विक्षोभकारी जैसी अवस्था में चली जाती है । इन समस्याओं के चयन के लिये प्रेरणा - प्रकृति को समझने में या प्रौद्योगिकियों के विकास के लिये संभाव्य अनुप्रयोगों से मिली है ।

इस एकक के प्रौद्योगिकी अभिमुखी अध्ययन, प्राथमिक रूप से अंतरिक्ष एवं रासायनिक अनुप्रयोगों पर केन्द्रीकृत हैं । उदा. - अनेक प्रकार की परिस्थितियों में स्तरीय तथा क्षोभकारी अवस्थाओं के बीच में बहाव स्थिरता एवं पारगमनों के अध्ययनों की सीधी संगतता अंसरिक्ष तथा रासायनिक प्रौद्योगिकियों से है । विक्षोभकारी बहावों के बहुलकों की कार्रवाई साथ ही अग्र पंखों पर पारगमन की प्रकृति में नई अंतर्द्रष्टियाँ ऐसे कार्यों से ही प्राप्त कर ली गई हें । विशेष रुचि का एक और क्षेत्र है - संगणनात्मक द्रव गतिकी प्रमुखतः अंतरीक्ष प्रौद्योगिकी से संबद्ध समस्याओं से है । कणकीय माध्यम की गतिकी पर अनुसंधान द्वारा मूलभूत वैज्ञानिक समस्याओं का पता लगाया जाता बै तथा जिनका सीधा अनुप्रयोग रासायनिकीय तथा अन्य प्रौद्योगिकियों में होता है ।

कीट उड़ानों से मेघों की द्रव गतिकी की जैविकीय समस्याओं तथा प्राकृतिक परिघटनाओं के अन्वेषण सैद्धांतिक एवं प्रयोगात्मक पद्धतियों के उपयोग द्वारा किये जा रहे हैं । तरंगिकाओं का उपयों उपकरण के रूप में करते हुए उस एकक के संकाय सदस्यों ने मानसून वर्षा के अस्थायी संरचनाओं का विश्लेषण करके यह प्रकट किया है कि पहले से भी संभाव्य से अधिक सांख्यिकीय महत्व के विशाल उच्चतर स्तरों पर सौर क्रियाओं के संभाव्य संयोजन होता है । एक और अनुसंधान का क्षेत्र है - मुख्य रूप से भू भौतिक रुचि का रहा है, जो दोहरे विकिरण शीप संवहन जिसका अन्वेषण, प्रयोगात्मकता के साथ - साथ अंकात्मक अनुसरण द्वारा किया जा रहा है । कीट-उड़ान पर अनुसंधान जिसमें सम्मिलित हैं - कण प्रतिबिंब वेगमापी तकनीकियों का उपयोग करके पवन सुरंग में प्रयोग द्वारा तथा पृथक भ्रमिलों के साथ संगणनात्मक अनुरूपणों के द्वारा अनुसंधान । यह कार्य, सूक्ष्म वायु वाहनों के अभिकल्प से भी संगत है जो अब पर्याप्त रूप से जूँकि परिवेशी वायु पर आरूढ मेघ असामान्य गुणधर्म व्यक्त करते हैं, अतः एकक में वर्तमान अनिसंधान उस रोचक परिघटना का पता लगाता है ।

एकक के संकाय सदस्य, भारत में अन्यत्र स्थित तथा विदेशों के विज्ञानियों के साथ विस्तृत सहयोगात्मक कार्यों में कार्यरत हैं । भारत के अधीन के हाल ही के सहयोगों के उदा. हैं - भारतीय वांतरिक्ष प्रयोगालय (NAL) तथा भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलूर तथा अंतर्राष्ट्रीय सहयोगों में सम्मिलित हैं क्वीन मेरी एवं वेस्ट फ़ील्ड कॉलेज (यू के) क्वीनेटिक (यू के) बोइंग अनुसंधान केन्द्र (यूएसए), विज़मन्न संस्थान (इसराइल) तथा स्टुगर्ट विश्वविद्यालय (जर्मनी) । NAL विज्ञानियों के साथ के सहयोगात्मक परियोजना में यह दर्शाया गया है कि समानांतर संगणना के लिये नेवियर स्टोक्स कोड को उचित रूप से अनुकूल बना लिया गया हे (फ्लो सॉल्वर का निर्माण NAL में किया गया है) । इसमें उच्च रेखीय गति को बढ़ाया है तथा 8 प्रक्रियकों (संसाधकों) पर 11 तत्व दिये हैं ।

EMU के साइट पर स्थित सुविधाएँ संकाय सदस्यों के विशाल प्रयोगात्मक तथा सैद्धांतिक अनुसंधान की रुचियों को समर्थन / सहायता प्रदान करती हैं । प्रयोगात्मक सुनिधाओं में सम्मिलित हैं - निम्न गति का पवन सुरंग, जो 2 मी. लंबाई तथा 0.6 मी X 0.6 क्रॉस सेक्शन के पारदर्शक परीक्षण सेक्शन। इन सुरंगों का प्रचालन, 1m/s से 10m/s तक की एक रूपीय गतियों पर किया जा सकता है। एक Nd-Yag लेसर (10 Hz, 120 mJ / स्पंद) कण प्रतिबिंब वेगमापी का एक अंग रहा है तथा जो तत्काल / स्वयं ही विमान में गतियाँ प्रदान करता है । एकक की संगणना सुविधाओं में सम्मिलित हैं- संगणना केन्द्र जिसमें अनेकों PCs हैं एक आठ नोड वाला फ़्लो सॉल्वर Mk6 प्रणाली तथा छह-नोड जेयाँन संसाधक गुच्छ ।





 
2012, जवाहरलाल नेहरु उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केन्द्र. Supported by W4RI