जवाहरलाल नेहरु उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केन्द्र
 
 

 
   
विकासवादी तथा जैविकीय जैविकी एकक

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विकासवादी तथा जैविकीय जैविकी एकक
 

जैविकीय प्रणालियों का आयोजन पदक्रम संरचनात्मक रूप में किया जाता है तथा अणुओं से लेकर परिसर व्यवस्था प्रणाली तक के स्तरों पर अध्ययन किया जा सकता है । संरचनात्मक संकीर्णता के एक या अन्य स्तर पर पर्मिट के रूप से केन्द्रीकृत दशकों के अध्ययनों ने सूचना निकाय को विस्तृत रूप से वर्धित किया है - वह ज्ञान हमारे पास स्थित है - जो जैविकीय प्रणालियों के बारे में है तथा टी एस इलियट के शोकगीत द्वारा उदाहरणीकृत अवस्था को अग्रसर करता है - " ज्ञान कहाँ है, हमने सूचना में उसे खो लिया है । " परिणामस्वरूप, जैविकी आज एक समेकित प्रावस्था में प्रवेश कर रही है जिसमें ही ऐसी भारी मात्रा की सूचना को समझ के रूप में संश्लेषित करने का प्रयत्न में हैं - जहाँ - जीवंत प्रणालियाँ किस प्रकार कार्य करती हैं तथा विकसित होती हैं ?
यद्यपि जैविकीय प्रणालियाँ, संरचना की दृष्टि से पदक्रमीय होती हैं , फिर भी विशिष्ट रूप से संरचनात्मक जटिलता के मानों के आर-पार समेकित होती हैं । जैविकीय प्रणालियों में कार्यात्मकता को अधिकतम, अर्थपूर्ण प्राकृतिक संदर्भ में निर्वाचित करने तथा समझ लेने की आवश्यकती होती है । अत्यधिक भारी मामलों में उसकी जटिलता के प्रमुख संरचनात्मक स्तर जो कार्यात्मकता से एक समेकित एकक होता है- वह बहुकोणीय जीव होता है तथा यह एक ऐसा जीव होता है जो अधिकांशतः एक प्राथमिक एकक होता है जिस पर प्राकृतिक चयन ही, पीढ़ियों से जीवों की कार्यात्मकता को रूपित करने हेतु कार्य करता है । जीवन की मूलभूत प्रक्रियाएँ जैसे चयापचय, मनोविज्ञान, व्यवहार तथा विकास से संबंधित जैविकीय प्रश्न अपने पारिस्थितिकी में सन्निहित जीव के संदर्भ में अत्युपयोगी लगते हैं । अवश्य ही, आज-कल जैविकीय ज्ञान प्राप्त करने का अर्थ होता है कि वर्धितरूप से एक ऐसा निरंतर प्रयत्न रहा है कि उनकी अपनी पारिस्थितिकीय संदर्भ में अर्थात उनके आवश्यक उत्थान, उनके जीवन की रीति तथा अपने ही अन्य जीव तथा विभिन्न प्रजातियों के साथ वे अंतर्क्रियाएँ करती हैं ।

जैविकीय जैविकी में, जीव एक अखंड रूप का होता है जिसके चारों ओर (ए) जैविकीय प्रणालियों में कार्यात्मकता के बारे में प्रश्न उभर आते हैं तथा (बी) हम जैविकीय जटिलताओं के विभिन्न संरचनात्मक स्तरों के अध्ययन से प्राप्त सूचना को ऐसी प्रश्नों के उत्तर देने के प्रयत्न के साथ संजोया जाता है। 'जैविकीय जैविकी' इस पदबंध का एक अर्थ है- आवश्यकता से अधिक ही लिया जा रहा है : सब मिलकर केवल जीवों के लिये ही जैविकी है। अब तो अणुओं के लिये कोई जैविकी नहीं होती जैसे गणितीय प्रतिरूप होता है। फिरभी अणुओं तथा गणितीय प्रतिरोधों की संरचना तथा गतिकी को समझ लेना, जीवों की जैविकी को समझ लेने में उपयोगी हो सकता है । अवश्य ही, जीवंत प्रणालियों में कार्यात्मकता को समझने के अन्वेषण में, जैविकीय जैविकी, विविध विज्ञान की शाखाओं से उपकरणों, तकनीकों तथा सूचनाओं का उपयोग करती है जिसमें सम्मिलित हैं- आण्विक आनुवंशिकी, जैव रासायनिकी, आकृतिकी, तंत्रिका कोशिका जैविकी, व्यवहार पारिस्थितिकी, संगणन, भौतिकी, सांख्यिकी तथा गणित ।

हमारा एकक, देश भर के एक ऐसा प्रमुख केन्द्र है जो कालक्रमिक जैविकी, विकासवादी आनुवंशिकी, जनसंख्या पारिस्थितिकी व्यावहारिक तंत्रिका कोशिका जैविकी व्यावहारिक पारिस्थितिकी तथा जाति भूगौलिकी में अनुसंधान एवं प्रशिक्षण के लिये प्रसिद्ध है । हम प्रयोगालय में तथा क्षेत्र में निम्न में से प्रयोगात्मक उपकरणों के संयोजनों के उपयोग से आनुभविक / प्रयोगात्मक अनुसंधान करते हैं - विकासवादी मात्रात्मक आनुवंशिकी, आण्विक आनुवंशिकी, तंत्रिका कोशिका जैविकी, विकासात्मक जैविकी, पशु स्वभाव तथा जनसंख्या जैविकी । हम जैविकीय प्रक्रियाओं के गणितीय प्रतिरूपों के संगणनात्मक अनुरूपणों के द्वारा सैद्धांतिक अनुसंधान का संचालन करते हैं ।

हमारा एकक अध्ययन के लिये अति सुसज्जित है जिसमें निहित हैं - प्रयोगात्मक तथा संगणनात्मक उपकरण, भारी संख्या के ड्रोसोफ़िला जीवसंख्या को नियमित दैनंदिन रूप से संभालने के प्रयोगालय, शरीर-क्रिया विज्ञान, जैव रासायनिकी, आणिविक जैविकी, जेनोमिक्स तथा प्रतिरोध कोशिका रासायनिकी तथा तीन अलग-अलग काल क्रमिक कक्ष हैं, जो ड्रोसोफ़िला, चींटियों तथा मूषिकाओं की नियंत्रित प्रकाश स्थितियों में अनुरक्षण करने के लिये तथा इन जीवियों में विभिन्न प्रकार के लयों के अनुवीक्षण के लिये हैं। कीटों तथा छोटे स्तनियों की प्रणालियों के अभिलेखन के हमारे कार्यकलापों के लिये हमारे पास 3500 वाहिनियाँ हैं जो संसार भर के हमारे पास ही ऐसी भारी सुविधावाली रही हैं ।



 
2012, जवाहरलाल नेहरु उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केन्द्र. Supported by W4RI