जवाहरलाल नेहरु उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केन्द्र
 
 

 
   
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग
का नानो विज्ञान एकक  

गृह नानो विज्ञान
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का नानो विज्ञान एकक  
 
ज ने उ वै अ कें पर नानो विज्ञान एकक
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा संस्थापित

नानो विज्ञान एवं नानो प्रौद्योगिकी का संबंध, नानो मीटर श्री के कम से कम एक आयामीयता से संलक्षणित नानो संरचनाओं के संश्लेषण, संलक्षण, गवेषण तथा उपयोगिता से है । ये एकल अणुओं तथा सामूहिक प्रणालियों के बीच में सेतु का कार्य करते हैं । प्रत्येक नानो संरचनाओं में सम्मिलित होते हैं - गुच्छ, प्रमात्रा, बिंदु, नानो कण, नानो तार तथा नानो नलिका इस में नानो संरचनाओं के संग्रहण में एक, दो या तीन आयामों के विन्यास संयोजन तथा अधि जालक सम्मिलित होते हैं । नानो वस्तुएँ सामान्य रूप से प्रमात्रा आकार के प्रभाव दर्शाती हें, जो गुणधर्मों के उचित नियंत्रण करती हैं तथा जो प्रौद्योगिकीय क्रांति के आश्वासन के प्रति उत्तरदायी दोती हैं, जो वर्तमान सूक्ष्म विद्युन्मानिकी के प्रति उत्तराधिकारी के गुप्त सूचक होती हैं । पिछले पाँच वर्षों में विश्व भर में नानो विज्ञान तथा नानो प्रौद्योगिकी में उन्नतियों, पदार्थ विनिर्माण, विद्युन्मानिकी औषधि निरमाणी उत्प्रेरक उद्योगों में चमत्कारी परिवर्तन ले आई हैं । नानो विज्ञान तो एक विज्ञान की एक अंतर्शाखा का विषय रहा है, अतः इसके लिये बहु मुखी अभिगम्यता की आवश्यकता होती है ।

प्रो. सी एन आर राव, प्रधान मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष के नेतृत्व में, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा नानो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सूत्रपात (NSTI) की स्थापना, देशभर में शैक्षिक एवं औद्योगिक वृत्तों में अत्यंत आवश्यक प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से की गई है । प्रो. राव स्वयं ही एक सक्रिय अनुसंधानकर्ता होने के कारण, देश के आर-पार के विभिन्न संस्थाओं के भारी संख्या के ऐसे अनुसंधानकर्ताओं को प्रेरित किया है जो रासायनिकी,भौतिकी पदार्थ विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी आदि विभिन्न अंतर्शाखाओं में विशेषज्ञता रखते हैं । इस NST के अंतर्गत अनुसंधान एवं विकास के लिये अनेकों परियोजनाओं की मंजूरी दी गई जिससे महत्वपूर्ण संभाव्य (विभव) अन्वयन को अग्रसर किया है ।

जनेउवैअकें में वैज्ञानिकों का एक सक्रिय समूह जो नानो विज्ञान के विभिन्न पहलुओं पर अनुसंधान का अनुसरण करता है । इसमें ऐसे क्षेत्रों के क्रियाकलाप सम्मिलित होते हैं - विभिन्न प्रकार के नानो पदार्थ, नलिकाओं, तारों तथा विभिन्न पदार्थों के कणों के संश्लेषण एवं गुणधर्म वर्णन तथा उनके रासायनिक रूपांतरण तथा संगठन साथ ही धातु आक्साइडों की पतली फ़िल्मों तथा चूर्णों के पारगमन जो रोचक भौतिक गुणधर्मों को दर्शाते हैं । इस दिशा में अनुसंधान को सुविधा प्रदान कराने हेतु, वर्तमान सुविधाओं के साथ अनेकों वैज्ञानिक उपकरणों को खरीदा गया है । ऐसे रोचक गुणधर्मों को दर्शानेवाले आधारभूत तांत्रिकता को समझ लेने के उद्देश्य से नानो प्रणालियों के सैद्धांतिक प्रतिरूपण का कार्य प्रारंभ किया गया है । नानो विज्ञान में अनुसंधान की रुचि के संवर्धन हेतु नानो विज्ञान में पाठ्यक्रम, चर्चा बैठकें तथा संगोष्ठियों जैसे अनेकों शैक्षिक कार्यकलापों की योजना बनाई गई हैं ।

एकक के अनुसंधान कार्यकलापों की कुछ विशिष्टताएँ : पिछले कुछ महीनों में, विभिन्न प्रकार के अजैविक नानो नलिकाओं तथा नानो तारों का संश्लेषण एवं गुणधर्म वर्णन किया गया है । नये संश्लेषित मार्गों को विकसित कर लिया गया है जो उत्तम उत्पादों के स्वच्छ प्रतिदर्श उपलब्ध कराते हैं। इन 1 डी प्रणालियों का परीक्षण, उनके संभाव्य संवेदक गुणधर्मों के लिये परिशोधन तंत्र व्यवहार तथा क्षेत्र उत्सर्जन के लिये कर लिया गया है । आगे, रंध्रीय नानो संरचनाओं के संचित संश्लेषण भी कर लिया गया है । धातु आक्साइडों के विभिन्न नानो स्फटिकों की क्रांतिक रूप से उनके आकार के आधार पर वर्धित चुंबकत्व को प्रदर्शित करते हुए देखा गया है । इसके अलावा, नानो स्फटिकों के मध्यदर्शन संयोजकों के विद्युन्मानीय एवं प्रकाशीय गुणधर्मों का अध्ययन भी कर लिया गया है । नानो पदार्थों के क्षेत्र में सैद्धांतिक प्रयत्नों को विभिन्न प्रकार की नानो प्रणालियों तथा उनके विद्युत धारा ओल्टेज गुणधर्मों के अनुरूपणों के द्वारा संवहन तंत्र को समझ लेने के प्रति समर्पित किया गया है । इन अध्ययनों द्वारा मध्यदर्शीय प्रमात्रा प्रणालियों में होनेवाली परिवहन पद्धति से संबंधित अनेकों प्रश्नों की समाधान किया गया है ।


 



 
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