जवाहरलाल नेहरु उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केन्द्र
 
 

 
    सैद्धांतिक विज्ञान एकक 

गृह सै.वि.ए
सैद्धांतिक विज्ञान एकक
 

तो सिद्धांत होता है जो यह निर्णय करता है कि किसका वीक्षण करना होता यों कहा था - अल्बर्ट आइनस्टन ने। सिद्धांत के बिना विज्ञान के बारे में विचार नहीं किया जा सकताः सिद्धांतवादी (सैद्धांतक व्यक्ति) ऐसा मूलभूत ज्ञान हमें उपलब्ध कराते हैं कि यह प्रकृति किस प्रकार कार्य करती है तथा इसी ज्ञान को व्यावहारिक अन्वयन में परिवर्तित कर भी देते हैं। जनेउवैअकें के सै.वि.कें का लक्ष रहा है कि हम इस भौतिक जगत में विक्षित संपन्नजीव विविधता के समाधान, स्पष्टीकरण तथा ज्ञान(जानने) प्राप्त कर लें। हम नये पदार्थों के नये-चमत्कारों या अभिकल्पों के पूर्वानुमान के उद्देश्य से इस ज्ञान का उपयोग कर लेना चाहते हैं। इस प्रयोजन से हम सै.भौ. तथा रासायनिकी साथ ही गणितिकी के तंत्रों का उपयोग भी करते हैं। हम विज्ञान की अंतर्शाखाओं(जैसे विकासवादी जैविकी) में भी रुचि रखते हैं जहॉ भौतिकी में से तंत्रों तथा विचारों का उपयोग (परिशुद्ध नई) अंतर्दृष्टि प्राप्त करने के लिये किया जाता है।

हमारे एकक में अनुसंधान के दो प्रेरणा स्रोत हैं - जो पदार्थ एवं जीव के अध्ययन के प्रति अनुपूरक अभिगम हैं - वे हैं - वैश्विकता की खोज तथा विविधता का अन्वेषण एवं विस्तरण। (आरंभिक) पूर्वकाल के विश्व में पदार्थ समरूपीय था, परंतु ऐसा ही बहुतसमय तक नहीं रहा। एक साथ स्वतः विभंजित सममितियों तथा प्रावस्था पारगमनों में अनुक्रमों के काऱण, अब हमारे चारों तरफ़ का जगत विभिन्नता तथा संकीर्णता दर्शाता हैः कार्बन वज्रादपि(हीरे जैसे) अतिकठोर तथा ग्राफ़ाइट जैसे अतिकोमल भी है, हिम जब पिघलता है(गल जाता है) तो संकुचित(घनीभूत) हो जाता है, जहॉ तॉबा(ताम्र) विस्तरित हो जाता है चर्वण गोंद को कुचलने से फ़ैल जाता है, जब कॉच पर होता है तो चरू-चूर हो जाता है, अधिकांश जीव बहुकोशिकीय होते हैं, तथा इनके द्वारा यौन(लैंगिक) जनन माहर्ह विशेषक होते हैं - क्यों? इस जटिल साथ ही मनमोहक(व्यवहार) स्वभाव को समझने के उद्देश्य से हमें मूलभूत स्तर पर ही इनकी संरचनाओं एवं गुणधर्मों की परीक्षा कर लेनी चाहिए तथा भारी संख्या के ऐसे अस्तित्व के जटिल परिणामों पर विचार करना चाहिए(चाहे) वे इलेक्ट्रॉन(विद्युदणु) हो परमाणु हो, अणु हो या जीवंत जीव जंतु क्यों न हो, जो एक दूसरे के साथ अंतर्क्रिया करते हैं। जब आधारात्मक प्राकृतिक नियम(साधारण) सरल रूप के लगते है, परंतु उनके संकीर्ण स्वभाव, प्रणाली आकार की वृद्धि के साथ-साथ आविर्भाव प्रकर होते हैं, इसे ही आविर्भाव कहते हैं तथा वह हमारे लिये मूलभूत रुचि का विषय रहा है।

हमारे संकाय सदस्यों ने बहुरूप (काय) भौतिकी, संगणनात्मक रासायनिकी, प्रमात्रा यांत्रिकीय सांद्रता कार्यात्मक सिद्धांत, सांख्यिकीय यांत्रिकी तथा गणितिकीय भौतिकी में मूलभूत प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया है। फ़िर भी, वर्तमान में अनुसरित(किया) जानेवाला कार्य स्वभावत(नैसर्गिकी रूप) विज्ञान की अंतर्शाखाओं पर आधारित है अतः हम इनकी सीमाओं को(सीमाहीन) अनंत सीमा तक परिवर्तित कर लेते हैं। तदनुसार, हम ऐसे छात्रों को भी अपनाते हैं (स्वीकारते हैं) जो ऐसे विभिन्न शैक्षिक अंतर्शाखाओं में स्नातकपूर्व या स्नातक उपाधिवाले होते हैं जैसे रासायनिकी, भौतिकी अभियांत्रिकी तथा संगणना विज्ञान।

विभिन्न समस्याओं में अपने ही बीच में सहयोग करने के अतिरिक्त हम सब, गहराई के साथ हमारे जनेउवैअकें तथा बाहर के प्रायोगिक सहयोगियों के साथ अंतर्क्रिया करते हैं। हम विश्लेषणात्मक एवं संगणन्त्मक तंत्रों का समिश्र तंत्र का उपयोग करते हैं, दूसरे के संदर्भ में हम जनेउवैअकें पर स्थित उच्च निष्पादनात्मक संगणनात्मक सुविधाओं से सहायता प्राप्त कर लेते हैं।

हमारे एकक का वातावरण, स्पंदनात्मक, अनौपचारिक तथा अंतर्क्रियात्मक रहा है। हमारे संकाय तथा छात्र अनेकों राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों तथा कार्यशालाओं में भाग लेते हैं ; हम स्वयं ही अनेकों संगोष्ठियों तथा चर्चा-गोष्ठियों का आयोजन करते हैं तथा हमारे यहॉ निरंतरता से प्रतिष्ठिक आगंतुकों का आगमन होता ही रहता है। हमारे एकक के पुराने छात्र (सदस्य) अपने व्यावसायिक जीवन(करियर) में (विशिष्ट) उत्कृष्ट रहे हैं ; उनमें से बहुत सारे व्यक्तियों ने भारत में तथा विदेश में अपने विश्वविध्यालय के समूहों की स्थापना भी कर ली है। हम सदा ऐसे छात्रों की प्रतीक्षा में रहते हैं जो विज्ञान के प्रति जिज्ञासु होते हैं तथा अनुसंधान प्रति प्रतिबद्ध (श्रद्धावाले) होते हैं; अगर आप इनमें से कोई एक हो तो हम आपसे आग्रह करते हैं कि आप हमसे संपर्क करें।



 
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